जंतर-मंतर पहुंचे चंद्रशेखर आज़ाद, सोनम वांगचुक से की मुलाकात; अनशनरत छात्रों को दिया समर्थन
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के बीच भीम आर्मी प्रमुख एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने सोनम वांगचुक से मुलाकात की। उन्होंने वांगचुक के स्वास्थ्य की जानकारी ली और वहां मौजूद आंदोलनरत छात्र-छात्राओं से मिलकर उनका हौसला बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन के प्रति अपना समर्थन और एकजुटता भी व्यक्त की।
चंद्रशेखर आज़ाद ने इस मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की, जिसके बाद यह मुलाकात राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई।
X पर साझा किया संदेश
अपने आधिकारिक पोस्ट में चंद्रशेखर आज़ाद ने लिखा कि उन्होंने जंतर-मंतर पहुंचकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्र-छात्राओं से भी बातचीत की तथा उनके लोकतांत्रिक संघर्ष के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
उन्होंने अपने संदेश में आंदोलन में पहुंचे भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं का भी आभार व्यक्त किया।
आंदोलनरत छात्रों का बढ़ाया हौसला
मुलाकात के दौरान चंद्रशेखर आज़ाद ने छात्रों से बातचीत कर उनकी मांगों और आंदोलन के उद्देश्य को समझने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
उन्होंने छात्रों से संयम बनाए रखने और अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से जारी रखने की अपील भी की।
सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता
सोनम वांगचुक कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। लंबे समय से जारी अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों में चिंता बनी हुई है।
जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक जी से आज मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। साथ ही आंदोलनरत छात्र-छात्राओं से मिलकर उनका हौसला बढ़ाया तथा उनके लोकतांत्रिक संघर्ष के प्रति अपना समर्थन एवं एकजुटता व्यक्त की। आंदोलन में पहुँचे भीम आर्मी-आजाद समाज… pic.twitter.com/LlyMRBkuDF
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) July 15, 2026
देश के अलग-अलग हिस्सों से सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र संगठन और विभिन्न सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग लगातार जंतर-मंतर पहुंचकर उनसे मुलाकात कर रहे हैं और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे हैं।
लोकतांत्रिक संघर्ष पर दिया जोर
चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन समाज और सरकार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे का समाधान बातचीत और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।
जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के समर्थन में देश के प्रमुख आंदोलनकारी नेता और नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद भी पहुंच गए।
— Shama Parveen (@ShamaParveen70) July 15, 2026
अब यह आंदोलन सिर्फ छात्रों की आवाज़ नहीं, बल्कि देशभर से उठ रहे जनसमर्थन का प्रतीक बनता जा रहा है। सवाल अब भी वही है।
क्या सरकार इस बढ़ते जनदबाव को सुनेगी? pic.twitter.com/OoQjCRIYTO
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण आंदोलनों का सम्मान किया जाना चाहिए।
समर्थन देने वालों की संख्या बढ़ रही
सोनम वांगचुक के आंदोलन को लेकर लगातार विभिन्न सामाजिक, छात्र और राजनीतिक संगठनों का समर्थन सामने आ रहा है। कई लोग जंतर-मंतर पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से उनसे मुलाकात कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपना समर्थन जता रहे हैं।
हालांकि, आंदोलन की मांगों और उससे जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की अपनी-अपनी राय भी सामने आ रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें
आंदोलन लगातार जारी रहने के बीच अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या दोनों पक्षों के बीच औपचारिक बातचीत शुरू होती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाले आंदोलनों में संवाद की शुरुआत समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील
जंतर-मंतर पर मौजूद कई सामाजिक संगठनों ने भी आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध ही सबसे प्रभावी माध्यम होता है।
इस बीच सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी लगातार व्यक्त की जा रही है और कई लोगों ने उनसे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की है।
चंद्रशेखर आज़ाद की जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात ने इस आंदोलन को नई राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना दिया है। उन्होंने जहां वांगचुक के स्वास्थ्य की जानकारी ली, वहीं आंदोलनरत छात्रों के साथ एकजुटता जताते हुए उनके लोकतांत्रिक संघर्ष का समर्थन भी किया।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में इस आंदोलन को लेकर क्या नई पहल होती है और क्या सरकार तथा आंदोलनकारियों के बीच किसी प्रकार का संवाद स्थापित हो पाता है।

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